नीमच,(अभिषेक शर्मा )। जिले में कोरोना के बढ़ते संक्रमणों के साथ मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। संक्रमण के मामलों में जिला स्वास्थ्य विभाग लगातार गंभीरता बरत रहा था और एक के बाद एक कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज में पूरी ईमानदारी दिखा रहा था।
लेकिन जिले में गुरूवार को एक ऐसा मामला प्रकाश में आया जिसमेें जिला स्वास्थ्य विभाग की निन्द उड़ा दी है, तो वहीं नीमच जिले की जनता भी आंखे भी खोल दी है।
हिन्दी खबरवाला एक ऐसा ही बड़ा खुलासा आज करने जा रहा है। जरा ध्यान से पढिय़ेगा ..
दरअसल जिले के ग्राम कुचड़ोद में निवास कर रहे ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि एक बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगडऩे के चलते उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था।
जहां से उनकी हालत को गंभीर देखते हुए इंदौर रैफर करने का निर्णय लिया गया। लेकिन उससे पहले नीमच जिला अस्पताल मेें ही उनका कोरोना जांच का सेम्पल लिया गया। जिसके बाद उन्हें रैफर कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि इंदौर में भर्ती कराने के चंद घंटो में ही बुजुर्ग का देहांत हो गया।
जिसके बाद परिजनों द्वारा विधी विधान से उनका दाह संस्कार कर दिया गया। अब बुजुर्ग की मौत के दो दिन बाद 6 सितम्बर को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई।
रिपोर्ट के पॉजिटिव आने के बाद जब जिला स्वास्थ्य विभाग ने मृतक बुजुर्ग के परिवार की सेम्पलिंग की तो उनके परिवार से तीन और एक पास का व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया। जिस पर गुरूवार शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना संक्रमित मरीजों को लेने पहुंची तो मौकेे पर परिजनों व ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा किया।
परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि नीमच जिला स्वास्थ्य विभाग कोरोना जैसी घातक बिमारी को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। अगर ऐसे ही लापरवाही बरती जायेगी तो नीमच जिले में कोरोना से जान गवाने वालों का आंकड़ा कई गुना बढ़ता जायेगा।
तीन घर के, एक बाहर का पॉजिटिव-
बुजुर्ग की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने केे बाद जब तक प्रशासनिक अधिकारियों ने सुध ली, तब तक बुजुर्ग के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा, पोता और घर के सामने निवास कर रहा एक व्यक्ति भी कोरोना से संक्रमित हो चुका था।
इंदौर जाते ही मौत-
जिला अस्पताल के जिम्मेदारों द्वारा जब बुजुर्ग व्यक्ति को नीमच से इंदौर रैफर किया गया तब इंदौर पहुंचने के कुछ घंटों के अंदर ही बुजुर्ग की मौत हो गई थी।
दाह संस्कार में उमड़ी भीड़-
बुजुर्ग का दाह संस्कार परिवार और गांव के रीति रिवाजों के अनुसार किया गया था। इस कारण दाह संस्कार में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी थी। जिससे ग्राम कुचड़ोद में प्रशासन की लापरवाही के चलते कोरोना संक्रमण फैलने का भी खतरा बढ़ गया है।
परिजनों ने किया हंगामा-
बुजुर्ग की मौत के बाद जब उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और परिवार की जांच के बाद जब सदस्यों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई तो जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम आनन-फानन में ग्राम कुचड़ोद पहुंची।
जहां पर जिला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते परिजनों व ग्रामीणों ने हंगामा खड़ा कर दिया। जिसके बाद समझाईश का दौर लगातार जारी रहा।
स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप-
इस पूरे मामले में जानकारों की माने तो जिला स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही बुजुर्ग की मौत के जरिये उजागर हो गई।
जब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और हंगामे का दौर शुरू हुआ तब मृतक बुजुर्ग के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की बड़ी लापरवाही बताई है।
ग्रामीणों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह यह-
ग्रामीणों ने हिन्दी खबरवाला को जानकारी देते बताया कि पूर्व में गांव के कुछ मरीजों को लेकर भी जिला स्वास्थ्य विभाग पॉजिटिव और नेगेटिव का खेल खेलता नजर आया। जिस मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी, उसे महज दो से तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती थी, और जिस मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव आती थी उन्हें सात से आठ दिनों तक भर्ती किया जाता था।
ग्रामीणों कहना है कि स्वास्थ्य विभाग पहले मरीजों की जांच बारिकी से करें उसके बाद ही पॉजिटिव व नेगेटिव के निर्णय पर जाये यूं नीमच जिले की भोली भाली जनता को गुमराह ना करें। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही से जनता का भरोसा दूसरे भगवान कहें जाने वाले डॉक्टरों से उठ रहा है।
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